उत्तरप्रदेश में कटहल के निर्यात के लिए सरगुजा में तैयार हुई नर्सरी

AMBIKAPUR Chhattisgarh News: उत्तरी छत्तीसगढ़ के सरगुजा व जशपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों के कटहल की उत्तरप्रदेश के बनारस और प्रयागराज के बाजारों में जबरदस्त मांग है। सीजन में किसानों के अलावा सिर्फ इसी व्यवसाय से जुड़े कारोबारी लगभग 50 लाख का कटहल ले जाते हैं। इसमें सरगुज़ा के साथ जशपुर जिले के सन्ना का कटहल सर्वाधिक लोकप्रिय है। यहां जो कटहल है उसी प्रजाति के डेढ़ हजार पौधे पहली बार राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय व अनुसंधान केंद्र अंबिकापुर में तैयार किए गए हैं जिसे किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। बीज से तैयार पौधों में पांच वर्ष के बाद फल प्राप्त होने लगेंगे। किसानों को कटहल की खेती से जोड़ने के लिए यह नया प्रयोग किया गया है।

सरगुजा-जशपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र बतौली, बगीचा व सन्ना में सर्वाधिक कटहल के पेड़ हैं। सरगुजा का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं जहां कटहल के पेड़ न हो। अधिकांश किसानों के बाड़ी में एक न एक कटहल का पेड़ होता ही है। पुराने वृक्ष में भी हजारों फल एक साथ नजर आते हैं। सरगुजा का कटहल अधिकतम 20-20 किलो तक होता है किंतु बाजार में सब्जी के लिए शुरुआती दिनों में ही आधा से एक किलो तक के कटहल तोड़ दिए जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों से यहां के सब्जी व्यापारी गांव-गांव जाकर पहले से ही पेड़ खरीद लेते हैं। जैसे ही फल लगता है उसे तोड़कर स्थानीय बाजार को छोड़कर उत्तरप्रदेश के बनारस और प्रयागराज की सब्जी मंडियों में पहुंचाते हैं।

सरगुजा की सब्जी मंडियों से दोगुने दाम पर हाथों-हाथ यहां का कटहल बिकता है। सरगुजा के कटहल की मांग उत्तरप्रदेश में इतनी अधिक है कि यहां के कृषि विज्ञानियों को कटहल का बेहतर उत्पादन के लिए पौधे तैयार करने की योजना बनानी पड़ी। कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र अंबिकापुर के कृषि विज्ञानियों ने जशपुर जिले के सन्ना और सरगुजा के बतौली क्षेत्र से इस बार बड़े पैमाने पर बीज एकत्र कराया। इसे अनुसंधान केंद्र में ही नई तकनीक से डेढ़ हजार पौधे तैयार किए हैं। इन पौधों को सरगुजा के किसानों को सस्ते दाम पर उपलब्ध कराया जाएगा ताकि हर किसान के बाड़ी में आने वाले दिनों में कटहल के पौधे नजर आएं।

जून माह में ही एकत्र कर लिया था बीज

कृषि महाविद्यालय व अनुसंधान केंद्र अंबिकापुर के अधिष्ठाता व वरिष्ठ कृषि विज्ञानी डॉ वीके सिंह के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञानी डॉ पीके भगत की टीम ने जून माह में ही बीज एकत्र कर लिया था और इसे महाविद्यालय के परिक्षेत्र में तैयार किया। शत प्रतिशत बीजों से अंकुरण निकला और अब बाड़ी में लगाने योग्य पौधे तैयार हो चुके हैं।

सरगुजा को बनाएंगे कटहल का हब

वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक व कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ वीके सिंह का कहना है कि सरगुजा को कटहल का हब बनाना है। कटहल के पौधे आसानी से लग जाते हैं। पांच साल बाद से कटहल के बीजू पौधे फल देने लगते हैं। कटहल लगाना काफी आसान है। एक बार लग गया तो कई पीढ़ियों तक फल देते रहता है। इस इलाके में कुछ ऐसी प्रजातियां हैं जो जमीन से ही फलने लगते हैं और काफी ऊंचाइयों तक फलते हैं। ऐसी प्रजातियों को हमने चुना है। डेढ़ हजार पौधे तैयार हो चुके हैं। जल्द ही उद्यान विभाग के माध्यम से इसे किसानों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष पांच हजार पौधे तैयार किए जाएंगे।किसानों को बेहतर आय अर्जित हो इसके लिए कटहल सबसे बेहतर है।

सब्जी व्यापारी संघ ने सराहा

सब्जी किसान,व्यापारी मित्र संघ के अध्यक्ष लक्ष्मी गुप्ता का कहना है कि वर्षों से यहां के किसानों को कटहल से अतिरिक्त आय की प्राप्ति हो रही है। किसान स्वयं चाहता है कि व्यापारी आकर उसके कटहल के वृक्ष को खरीद ले और एक सीजन का पूरा पैसा देकर जाए। किसानों के हित में व्यापारी अग्रिम राशि का भुगतान भी करते हैं। यहां का कटहल उत्तरप्रदेश ही नहीं बल्कि रायपुर, बिलासपुर, मध्यप्रदेश के शहडोल, जबलपुर, कटनी तक पहुंचता है। सरगुजा के बतौली श्रीनगर, लखनपुर, उदयपुर, सीतापुर में बड़े पैमाने पर कटहल के पेड़ किसानों की बाड़ियों में लगे हैं।कृषि विज्ञान केंद्र की पहल निश्चित रूप से आने वाले दिनों में सरगुजा के किसानों के लिए लाभदायक होगा।

इन गुणों से भरपूर है कटहल

कटहल कई गुणों से भरपूर होता है। कटहल में विटामिन ए, विटामिन सी, थायमीन, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन और जिंक प्रचुर मात्रा में होता है।इन सबके अलावा इसमें भरपूर फाइबर होता है। इसमें कैलोरी नहीं होती है। इस कारण ये हार्ट से जुड़ी कई बीमारियों में भी फायेमंद है। कटहल में पाया जाने वाला पोटेशियम हार्ट से जुड़ी बीमारियों से सुरक्षित रखता है। उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए ये बहुत ही फायदेमंद है। आयरन का एक अच्छा माध्यम है जिसकी वजह से एनीमिया से बचाव होता है। ब्लड सर्कुलेशन भी नियंत्रित रहता है।अस्थमा के इलाज में भी औषधि की तरह काम करता है। इसमें पाए जाने वाले कई खनिज हार्मोन्स को भी नियंत्रित करते हैं। कटहल में मैग्नीशियम भी पर्याप्त मात्रा में होता है,जिसकी वजह से हड्डियां भी स्वस्थ और मजबूत रहती हैं। कटहल में पाए जाने वाले विटामिन सी की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी बनी रहती है। कटहल का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसमें भरपूर रेशे होते हैं,जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाए रखते हैं।

 

 

Priti Chaubey

Recent Posts

लॉकडाउन में देह व्यापार मजबूर राजस्थान का घुमंतू समुदाय !

आज़ादी के बाद से लेकर अब तक 6 आयोग बने हैं. इनका काम घुमन्तू समुदायों…

2 weeks ago

महात्मा गांधी केंद्रीय विवि के मीडिया अध्ययन विभाग में भरतमुनि संचार शोध केंद्र का हुआ उद्घाटन

अभा संत समिति के महामंत्री पूज्य स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती जी ने अपने आशीर्वचन में शोध…

2 weeks ago

डॉ साकेत बने भरत मुनि शोध केंद्र के सह समन्वयक

मोतिहारी। महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के नव गठित आचार्य भरत मुनि संचार शोध केंद्र में…

2 weeks ago

कैसे करें आईटीआर फॉर्म-1 फाइल?

इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने का मतलब सरकार को अपनी आमदनी की जानकारी देना…

2 months ago

अगर आपकी इनकम टैक्सेबल नहीं है तो क्या आपको भरना चाहिए ITR? क्या हैं इसके फायदे?

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में बस एक दिन का समय बचा है, ऐसे में…

2 months ago

केंद्र ने राज्यों से नए साल पर कोरोना वायरस को लेकर पाबंदियों पर विचार करने के लिए कहा

कोरोनावायरस के नए स्ट्रेन के डर को देखते हुए केंद्र सरकार ने नए साल के…

2 months ago

This website uses cookies.