कभी संरक्षित जंगल था अंबिकापुर का ऐतिहासिक महामाया पहाड़, अब हो गए अवैध कब्जे

भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने कलेक्टर सरगुजा को पत्र लिखकर शहर से लगे महामाया पहाड़, खैरबार, घुटरापारा के संरक्षित वन क्षेत्र की शासकीय भूमि पर हो रहे अवैध कब्जे पर टीम बनाकर जांच कराने और अवैध कब्जे पर रोक लगाने की मांग की है। कलेक्टर संजीव झा के नाम से दिए पत्र में भाजपा के वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे ने कहा है कि अंबिकापुर का महामाया पहाड़, खैरबार एवं घुटरापारा में संरक्षित घने जंगल थे। इससे पूरे शहर को आक्सीजन प्राप्त होती थी। इसके साथ ही इस इलाके में व्यापक पैमाने पर नजूल व शासकीय भूमि थी। यह देखा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में इन क्षेत्रों के वन संरक्षित शासकीय भूमि पर बिहार, झारखंड प्रांत से आए लोग बेखौफ होकर कब्जा कर रहे हैं और घर मकान बना रहे हैं। शहर से लगे इस इलाके में वार्ड के पार्षद और अन्य प्रभावशाली लोगों का संरक्षण भी मिल रहा है। इनका तत्काल नगर निगम में व ग्राम पंचायत में नाम भी जुड़ जाता है और राशन कार्ड, आधार कार्ड बन जाता है। यह अंबिकापुर के स्थाई निवासी बन जाते हैं।

पार्षद दुबे ने कहा है कि आए दिन इन इलाकों में कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति निर्मित हो रही है। सांप्रदायिक संघर्ष होता है। मजबूरी में पुलिस प्रशासन को घुटरापारा व महामाया मंदिर के बीच में एक पुलिस सहायता केंद्र खोलना पड़ रहा है, ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। पार्षद ने कहा है कि कभी यह क्षेत्र वनाच्छादित था जिससे पूरे शहर को आक्सीजन मिलता था अब इसमें 80 प्रतिशत जंगल काट कर पेड़ का सफाया कर दिया गया है और इस इलाके में झारखंड, बिहार से जो भी संदिग्ध लोग आकर बसे हैं न तो वे थाने में मुसाफिर दर्ज कराते हैं और न कोई इनका कोई व्योरा उपलब्ध है।

पार्षद ने कलेक्टर से मांग किया है कि इस क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में बसे लोग कहां से आए हैं, इनका उस राज्य में क्या अपराधिक रिकार्ड है उसकी संपूर्ण जांच कराई जाए। यह मोटरसाइकिल मैकेनिक, गाड़ी मैकेनिक, दर्जी, राजमिस्त्री का काम करते हैं। यदि इसकी जांच नहीं की गई तो आने वाले दिनों में शहर के वातावरण को ऐसे लोग खराब करेंगे और माहौल बिगड़ने में वक्त नहीं लगेगा। उन्होंने कहा है कि इनको प्रबल राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण वन विभाग के वन मंडल अधिकारी, नगर निगम के आयुक्त, तहसीलदार एवं नजूल अधिकारी कार्रवाई नहीं करते और हाथ डालने से डरते हैं।

खैरबार रोड के दोनों हिस्से पर अवैध कब्जा

पार्षद आलोक दुबे ने बताया है कि खैरबार रोड बाकी डेम तक स्थित है। इसी मार्ग से खैरबार सहित मलगंवा, रामनगर, गांझाडांड़, बांसा सहित लुंड्रा इलाके के कई गांव के लोगों का आवागमन भी होता है। सिंगल लेन सड़क होने के कारण दुर्घटनाएं भी होती हैं। इन सबके बावजूद पिछले कुछ दिनों से इस सड़क के दोनों हिस्से पर अवैध कब्जा लोगों के द्वारा किया जा रहा है। जगह-जगह रातों-रात मकान बनाए जा रहे हैं, जिससे शासकीय प्रयोजन के लिए जमीन तक नहीं मिल रही। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई नहीं करते। उन्होंने कहा है कि यदि प्रशासन, वन विभाग इस मामले में त्वरित पहल कर कार्रवाई नहीं करता है तो मैं प्रदेश के मुख्यमंत्री, वन मंत्री, राजस्व मंत्री से भी इसकी शिकायत करूंगा।

Pallavi Agarwal

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