कोरोना से विटामिन-डी की दैनिक खुराक हासिल करने से पाया जा सकता है छुटकारा

रोग-प्रतिरोधक क्षमता में सुधार के लिए विटामिन-सी और जिंक की खुराक बढ़ाना ही काफी नहीं है। रोज सुबह दस से 15 मिनट धूप सेंकना भी बेहद जरूरी है। जी हां, बोस्टन यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन में विटामिन-डी को कोरोना के खिलाफ जंग में बेहद अहम करार दिया गया है।

शोधकर्ताओं की मानें तो जो लोग धूप सहित अन्य स्रोतों से शरीर के लिए जरूरी विटामिन-डी की दैनिक खुराक हासिल करते हैं, उनमें कोविड-19 से मौत का खतरा 52 फीसदी कम होता है। ऐसे लोगों के सार्स-कोव-2 वायरस के चपेट में आने की आशंका भी 54 फीसदी कम मिली है।

डॉ. माइकल होलिक के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने तेहरान के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती 235 संक्रमितों के खून के नमूने का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि केविटामिन-डी की कमी से जूझ रहे लोगों  कोविड-19 से गंभीर रूप से संक्रमित होने और सेप्सिस की जद में आने का खतरा ज्यादा रहता है। दोनों ही सूरतों में संक्रमितों की जान बचाने में डॉक्टरों को खासी मशक्कत करनी पड़ती है। पूर्व में हुए अध्ययनों में देखा गया था कि श्वेत और बुजुर्गों के लिए कोरोना ज्यादा जानलेवा साबित होता है।

होलिक के मुताबिक विटामिन-डी विषाणु से जुड़कर उसका खात्मा करने की प्रतिरोधक कोशिकाओं की क्षमता बढ़ाता है। टी-कोशिकाओं को संक्रमित कोशिकाओं तक पहुंचाने और ‘साइटोकिन स्टॉर्म’ की प्रक्रिया रोकने में भी इसकी अहम भूमिका पाई गई है। मालूम हो कि साइटोकिन हानिकारक विषाणुओं के खात्मे में सक्षम एक प्रतिरोधक प्रोटीन है।

हालांकि, नए तरह के वायरस को नष्ट करने की जद्दोजहद में प्रतिरोधक तंत्र कई बार अतिसक्रिय हो जाता और ज्यादा मात्रा में सोइटोकीन पैदा करने लगता है। वैज्ञानिक भाषा में इस अवस्था को ‘साइटोकिन स्टॉर्म’ कहते हैं। इससे शरीर को हमलावर वायरस से कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। अंग खराब होने से मरीज की जान तक जा सकती है।

सावधान-
-235 मरीजों पर बोस्टन यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन से खुलासा

-52% घटता है मौत का खतरा यह विटामिन पर्याप्त मात्रा में होने पर
-54% कम होती है सार्स-कोव-2 वायरस की चपेट में आने की आशंका

स्रोत
-धूप सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत, त्वचा के नीचे मौजूद कोलेस्ट्रॉल के साथ रासायनिक क्रिया कर विटामिन-डी का उत्पादन करती है

 

Priti Chaubey

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