Bihar Election2020: बिहार में एनडीए और महागठबंधन दोनों की गांठ कमजोर आखिर क्यों हो रही कमजोर

चुनावी सुगबुगाहट के बीच बिहार में एनडीए और महागठबंधन दोनों की गांठ कमजोर होती दिख रही है। एनडीए में जहां लोजपा तो महागठबंधन में रालोसपा के तेवर ढीले होते नहीं दिख रहे हैं। लोजपा जहां सीधे सरकार को चुनौती दे रही है तो रालोसपा ने गुरुवार को दो टूक कह दिया कि सीएम नीतीश कुमार के सामने राजद जिस नेतृत्व (तेजस्वी) को सामने ला रहा है, उस मुकाबले में महागठबंधन कहीं नहीं टिकेगा। लोजपा और रालोसपा के इस तेवर से यह अर्थ निकाला जा रहा है कि जल्द ही दोनों दल अपने-अपने गठबंधन से अलग होने का औपचारिक ऐलान कर दें।

गुरुवार को हुई रालोसपा की बैठक में जिला, प्रदेश व राष्ट्रीय कमिटि ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा कि दल किस गठबंधन में रहेगा, इसका निर्णय उपेन्द्र कुशवाहा लेंगे। महागठबंधन में रहने या नहीं रहने को लेकर उपेन्द्र कुशवाहा को अधिकृत कर दिया है। महागठबंधन में बने रहने को लेकर तमाम कोशिशों का उल्लेख करते हुए पार्टी ने कहा है कि राजद के व्यवहार के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है कि अब निर्णय लेने का समय आ गया है।

वहीं उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि महागठबंधन में अभी जो परिस्थिति है, उस पर विचार करते हुए पार्टी ने मुझे अधिकृत किया है। मैं सोच समझकर बिहार की जनता और अपने कार्यकर्ताओं के हित का ख्याल करते हुए निर्णय लूंगा।

दूसरी ओर लोजपा ने कहा है कि बिहार की जनता 15 साल बनाम 15 साल के सरकारों को देख चुकी है। इस बार वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में जनता एक बेहतर विकल्प ढूंढ़ रही है। लोजपा के प्रदेश प्रधान महासचिव शाहनवाज अहमद कैफी ने कहा है कि बिहार की जनता अब ऐसे व्यक्ति को अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है जो एक पुत्र और सेवक की तरह उनकी सेवा कर सके। दिन-रात राज्य की भलाई के लिए समर्पित हो। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान सबसे बेहतर विकल्प हैं, जिनके पास राज्य को विकसित बनाने का पूरा रोडमैप है।

उन्होंने यह भी कहा है कि हमारे हर कार्यकर्ता की इच्छा है कि विधानसभा के चुनाव में लोजपा 143 सीटों पर लड़े। चिराग पासवान राष्ट्रीय राजनीति को छोड़कर प्रदेश की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हों। ताकि बिहार को एक सच्चा और मेहनतकस जनसेवक मिल सके।

Priti Chaubey

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